Tue. Oct 19th, 2021

यह संसार एक ऐसी जगह है जहां अगर कोई नाम कमाता है किसी भी वस्तु को लेने खरीदने बेचने के लिए तो उसको हमेशा इतिहास में याद किया जाता है.हम बात करें मारुति 800 की पहली कार किसने खरीदी और उसको पहली मारुति 800 को खरीदने वाले की तो हरपाल सिंह का नाम ही पहले नंबर पर आता है.हरपाल सिंह ने देश की पहली मारुति 800 कार खरीदी थी. मारुति 800 एक ऐसी कार आई थी मार्केट में जिसको मिडिल क्लास परिवार के लोग भी खरीदने के लिए आगे आए और इस मारुती एट हंड्रेड की बाजार में आने के बाद, इसकी बुकिंग शुरू होने के बाद सिर्फ दो महीनों में ही भीतर 1.35 लाख कारें बुक हो गईं.मारुति 800 रेट की इतनी ज्यादा मांग बढ़ गई क्या उसके लिए लोगों को लंबी कतार में खड़ा होना पड़ा. आपको बता दें हरपाल सिंह वह भाग्यशाली व्यक्ति थे.जिन्हें मारुति 800 की पहली कार की हासिल करने का मौका मिला.

कौन है यह हरपाल सिंह

आप को बतादे दिल्ली के हरपाल सिंह को 14 दिसंबर 1983 से पहले कम ही लोग जानते थे. लेकिन इस दिन मारुति 800 की लॉन्चिंग के साथ-साथ लोगो के बीच हरपाल सिंह को पूरी दुनिया मे खास पहचान मिलगई .मारुति सुजुकी की पहली मारुति 800 कार इंडियन एयरलाइंस के कर्मचारी हरपाल सिंह को ही सौंपी गई थी. पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी से कार की चाबी लेते हुए उनकी तस्वीर भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का भी एक हिस्सा बन गई.

आपको बता दें हरपाल सिंह ने  मारुति 800 कार ली थी, उसकी नंबर प्लेट भी खूब लोकप्रिय हुई, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर है- DIA 6479. हरपाल सिंह ने मारुति 800 कार को खरीदने के लिए अपनी फिएट कार को भी बेच दिया था.हरपाल सिंह की मृत्यु वर्ष 2010 में हुई और 1983 में पहली मारुति 800 कार खरीदने के बाद वह पूरी जिंदगी उसी कार को चलाते रहे. हरपाल सिंह का ऐसा मानना था  कि यह कार उन्हें भगवान की कृपा से मिली है, इसलिए उसे कभी नहीं बेचा गया उनके बाद वह कार नहीं चली है और ग्रीन पार्क में उनके घर के पास खड़ी जंक खा रही थी.कार को फिर से रिस्टोर किया गया है. कुछ लोग इस कार को वापस खरीदने की इच्छा जता रहे हैं.हरपाल सिंह की मौत के बाद इस कार को किसी ने नहीं चलाया है और यह कार  खड़े-खड़े जंग खा रही थी. फिर इस कार को रिस्टोर किया गया बाहर से भी और अंदर से भी. बहुत से लोगों ने इस कार को फिर से खरीदने की इच्छा जताई. लेकिन हरपाल सिंह के परिवार ने इस कार को बेचने से इंकार कर दिया.

मारुति 800 का सपना देखने वाले संजय गांधी जिन्होंने बाजार में सस्ती कार लाने का एक सपना देखा था. यह बात 4 दशक पहले की है. संजय गांधी मिडिल क्लास के लिए सस्ती कार लाने का सपना देखा था.और दुर्भाग्यवश 1980 मैं एक प्लेन क्रैश हादसे में संजय गांधी की मौत हो गई.लेकिन संजय गांधी का मिडिल क्लास के लिए सस्ती कार का यह सपना धीरे-धीरे परवान चढ़ा और  तब मारुति उद्योग लिमिटेड के नाम से शुरू हुई कंपनी मारुति सुजुकी ने सबसे सस्ती कार लॉन्च की. मारुति की यह कार मार्केट में आने के बाद.ये कंपनी भारत सरकार और जापान की सुजुकी मोटर कंपनी के बीच एक ज्वाइंट वेंचर के तहत शुरू की गई थी.

खबरों के अनुसार मारुति सुजुकी ने 9 अप्रैल 1983 को कार की बुकिंग शुरू की  सिर्फ दो महीनों में ही 8 जून तक  1.35 लाख कारों की बुकिंग हो गई. यह बुकिंग बहुत बड़ी थी. कंपनी ने अपनी पहली कार को मारुति 800 के नाम से बाजार में उतारा, जिसकी कीमत उस वक्त सिर्फ 52,500 रुपये थी.यह कार ना सिर्फ अपनी कीमत के लिए मशहूर हुई. इसे चलाना भी आसान था और इसका माइलेज भी उस वक्त की गाड़ियों की तुलना में अच्छा था.

अभी क्या हाल है हरपाल सिंह की कार का?

हरपाल सिंह ने जो मारुति 800 कार ली थी, उसकी नंबर प्लेट भी खूब लोकप्रिय हुई, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर है- DIA 6479. हरपाल सिंह ने मारुति 800 कार को खरीदने के लिए अपनी फिएट कार को भी बेच दिया था.हरपाल सिंह की मौत 2010 में हुई और 1983 में पहली मारुति 800 कार खरीदने के बाद वह पूरी जिंदगी उसी कार को चलाते रहे.वह मानते थे कि यह कार उन्हें भगवान की कृपा से मिली है, इसलिए उसे कभी नहीं बेचा. ग्रीन पार्क में उनके घर के पास खड़ी जंक खा रही थी.कार को किया गया रीस्टोर, बहुत से लोगों ने जताई खरीदने की इच्छा.

हरपाल सिंह की मारुति 800 को खरीदने के लिए रिस्टोर होने के बाद काफी लोगों ने इच्छा जताई लेकिन उनके परिवार वालों ने उसे बेचने से इनकार कर दिया.हमारी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी चाहती थीं संजय गांधी का सपना पूरा होमारुति सुजुकी के नॉन एग्जिक्युटिव चेयरमैन आरसी भार्गव ने बताया हैं  यह सब अचानक नहीं हुआ, सरकार की लिस्ट में प्राइवेट ट्रांसपोर्ट थोड़ा नीचे थी, क्योंकि तब तक यह इसे लग्जरी और अमीरों की चीज माना जाता था.वैसे तो उस दौर में सरकार पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर ही फोकस करती थी.

 

लेकिन इंदिरा गांधी ये चाहती थीं कि संजय गांधी ने जिस सस्ती कार का सपना देखा है, वह उनकी मौत के बाद भी जिंदा रहे.यही कारण है कि इस कंपनी के लिए सरकार ने कुछ मदद भी मुहैया कराई. खबरों के अनुसार ऐसा कहा गया है की सरकार ने इस कार के बहुत से पार्ट और तकनीक के लिए कस्टम ड्यूटी में भी छूट दी थी.लेकिन कंपनी इस बात को नहीं मानती है. उस ज़माने में किसी भी सरकारी कंपनी में विदेशी कंपनी का शेयर नहीं था.लेकिन मारुति सुजुकी एक पहली पसंद की तरह सामने आई.उस समय 40 फीसदी तक विदेशी कंपनी की हिस्सेदारी को इजाजत मिली थी.

लेकिन यह किसी ने नहीं सोचा था संजय गांधी का यह सस्ती कार का सपना के मिडिल क्लास भी कार खरीदने का अपना सपना पूरा कर सके यह पूरा हो पाएगा यह कार सभी की इतनी ज्यादा लोकप्रिय कार बन जाएगी.और बरसो यह कार बाजार में अपनी जगह बनाए रखेगी.यह कार मारुति 800 कुछ वर्ष पहले वर्ष 2014 में बंद हो गई.इन 31 वर्षो में कंपनी ने करीब 27 लाख मारुति 800 कारें बेचीं है. उसकी जगह कंपनी ने बाजार में अल्टो 800 उतारी. जिसे भी लोगों ने खूब पसंद किया. आपको बता दें खबरों के अनुसार एक बार फिर सरकार  फिर से मारुति 800 को रीलॉन्च कर सकती है.

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