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किसी भी देश या जगह पर रहते हुए किसी दूसरे जगह के लिए जासूस बनकर रहना या जासूसी का काम करना बहुत ज्यादा कठिन होता है. और इस कार्य को करने में इंसान अपनी पहचान अपने पीछे की जिंदगी सब कुछ भुला कर  सिर्फ अपने काम पर ही ध्यान केंद्रित करता है. ऐसे जासूसी के काम करने के लिए बहुत ज्यादा हिम्मत की भी जरूरत होती है.बहुत से ऐसे लोग होते हैं जिन्हें जासूसी करने में बहुत ज्यादा हिम्मत भी जुटानी पड़ती होगी.और वह इस कार्य को करने के लिए अपना पूरा जीवन भी लगा देते हैं. आज हम आपसे ऐसे ही एक जासूस के बारे में चर्चा करेंगे जिन्होंने अपनी असली पहचान को पूरी तरह छुपाते हुए अपने जासूसी के कार्य को अंजाम दिया जी हां आज हम आपसे चर्चा करने वाले हैं रविंदर कौशिक के बारे में जिन्होंने अपनी असली पहचान को छुपा कर अपनी एक नई पहचान बनाई और पूरा जीवन जासूसी के काम में ही बिता दिया.

रविंद्र कौशिक को थिएटर का काफी ज्यादा शौक था उन्हें थिएटर से इतना लगाव था कि वह थिएटर में इतना अच्छा अभिनय किया करते थे कि उनकी कलाकारी को सभी पसंद करते थे. रविंद्र कौशिक का जन्म राजस्थान के श्रीगंगानगर में हुआ था 11 अप्रैल 1952 को रविंद्र कौशिक पैदा हुए थे.थिएटर करने का काफी ज्यादा शौक था.इस लगाओ ने उन्हें एक अच्छा कलाकार बना दिया था थिएटर में उनकी कलाकारी को देख कर रॉ ने उन्हें स्पॉट  कर लिया था. रविंद्र ने वर्ष 1975 में ग्रेजुएशन पूरा किया सिर्फ 23 वर्ष की उम्र में उन्होंने रॉ ज्वाइन कर ली. उनका नया नाम नबी अहमद शाकिर था. उनके सारे पिछले रिकॉर्ड  डिलीट कर दिए गए थे.इसके बाद उनको पाकिस्तान खुफिया मिशन पर भेज दिया गया था.

दी गई थी पूरी ट्रेनिंग
रॉकी द्वारा उन्हें अंडरकवर एजेंट के लिए पूरी तरह से तैयार किया गया था. मिशन पाकिस्तान रवाना होने से पहले उन्हें 2 वर्ष की ट्रेनिंग दी गई थी. उन्होंने उस ट्रेनिंग के दौरान उर्दू सिखाई गई.वही मुस्लिम धर्म से जुड़ी कुछ जरूरी और खास बातों के बारे में भी जानकारी दी गईवहां जाकर भी पढ़ाई जारी रखीरविंद्र कौशिक ने पाकिस्तान पहुंचने के बाद कराची विश्वविद्यालय में दाखिला ले लिया यहीं से उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई को भी पूरा किया.पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पाकिस्तानी सेना ज्वाइन कर ली.

रविंद्र कौशिक को हो गया फिर प्यार
इसी जॉइनिंग के दौरान रविंद्र कौशिक को पाकिस्तान के आर्मी अफसर की बेटी से प्रेम हो गया.उनका नाम अमानत था पहले वह दोनों दोस्त थे बाद में दोनों की शादी हो गई उन्होंने अमानत को भी अपने जासूसी के इस काम के बारे में कुछ भी पता नहीं लगने दिया. वह रो में काम करते रहे दोनों ने अपने बेटे का नाम आरिफ अहमद खान रखा.आपको बता दें रविंद्र कौशिक को ब्लैक टाइगर के नाम से भी जाना जाता था.वर्ष 1979 से 1983 के बीच उन्होंने कई अहम जानकारियों को भारत सेना तक पहुंचाया. उनकी बहादुरी के कारण ही उनको ब्लैक टाइगर भी कहा जाता था.इसके पश्चात सितंबर 1983 में भारत में एक लो लेवल जासूस इनायत मसीह को रविंदर कौशिक को कांटेक्ट करने को कहा. पाक सेना ने उन्हें पकड़ लिया फिर उसने सारा सच बता दिया इसके बाद कौशिक भी पकड़े गए.

टाइगर को सुनाई गई मौत की सजा
1985 में पाकिस्तान की अदालत ने कौशिक को मौत की सजा सुना दी थी बाद में सुप्रीम कोर्ट ने सजा को उम्रकैद में बदल दिया था.रविंद्र कौशिक को पाकिस्तान के सियालकोट स्थित कोट लखपत और मियांवाली जिलों में करीब 16 वर्षों तक बंद रखा.
जेल में रहने के कारण से उन्हें टीबी,अस्थमा और दिल की बीमारियां हो गई थी.नवंबर 2001 में वह दुनिया को अलविदा कह गए.
मौत के बाद उन्हें मुल्तान की सेंट्रल जेल में दफना दिया गया था.

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